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Saturday, December 18, 2021

पलकें ना झुकाएं मोहतरमा


पलकें ना झुकाएं मोहतरमा 
कहीं रात अँधेरी हो जाए ना 

जुल्फों को ना अपने सुलझाओ 
कहीं बात अधूरी रह जाए ना 

यूं बातों पर मेरे हसना मत 
कहीं और मुलाकात दिल चाहे ना 

हाथों से ना जुल्फें छूना तुम 
कहीं  दीवानें सब बन जाए ना 

गालों की लाली छुपा लो तुम 
कहीं चाँद अभी शरमा जाए ना 

होठों को ना अपने हिलाएं आप 
कहीं दिल की धड़कन रुक जाए ना 

जाने की बात ना छेड़ा करो 
कहीं दुनिया मेरी ढह जाए ना 

पलकें ना झुकाएं मोहतरमा 
कहीं इज़हार - ए - इश्क़ हम कर जाए ना 

Monday, December 13, 2021

भुला दे मुझको


कभी हो हल्ला कभी झल्लाकर 
कभी प्यार भरी मीठी बातें 
कभी मन ही मन फिर मुस्काकर 
जब होती छुप छुप मुलाकातें 

कभी डर कर या कभी घबराकर 
मिलने की चाहत आहत कर 
बेमन से कभी मना करके 
दिल की गुन धुन सुना पड़ते 

कहते बातें तुम किया करो 
पर वक्त जरा कम किया करो 
मिलने के बहुत बहाने ना 
तुम सोचो ना हीं बुना करो 

हम मिलेंगे जब मिलना होगा 
जो लिखा है तकदीरों में 
ना बदले वो तस्वीरों में 
फिर जुदा तुम्हें करना होगा 

जीवन की सारी बाधाएं 
ना बन जाएं कहीं गाथाएं 
तू रहने अकेला दे मुझको 
तेरी ज़िद से ना बदलूं खुदको 

ना वक्त तू जाया कर अपना 
तुझसे जुड़ा ना कोई सपना 
देखेंगे कब तक मिलते हैं 
तेरी बातों से हम खिलते हैं 

अब विदा मैं तुझको करती हूं 
कहने से कुछ भी डरती हूं 
मैं भूल चुकी हूं अब तुझको 
तू भी बढ़ आगे भुला मुझको 

इश्क़ नहीं मिटता


जर्रे जर्रे में तेरी महक और साँसों की खुशबू हवाओं में 
ऐ सनम हम तुम्हें कैसे बताएं क्या मिला है फ़िज़ाओं में 

तेरे सवाल हमारे मिलने पर उँगलियाँ जब उठाते हैं 
क्या बताऊँ जहन में तब खयालात बुरे सताते हैं 

क्यों वही तड़प तुझमें नहीं जो डसती है मेरे सीने में 
क्या मोहब्बत सिर्फ हमनें की यूं इश्क़ के महीने में ?

इश्क़ उम्र का मोहताज नहीं होता है जनाब 
इश्क़ में धड़कनें सुनिए, ना रखिये उसका हिसाब 

इश्क़ वो बला है जो बिन बुलाये आ जाए 
दिल टूटने के बाद भी जो रुके और सज़ा पाए 

मिट गए सब इश्क़ करने वाले इतिहास की किताबों में 
पर इश्क़ ना मिटा था उनका और ना मिटेगा इन हवाओं में 

कभी कभी अपने मोहब्बत से मिल कर तो देखिये आप
नज़रों की चमक और दिल की धड़कनें दोनों हीं बढ़ती हैं जनाब 

प्रवीण हों आप इश्क़ में या फिर कोई नवीन हो
प्रेरणा इस इश्क़ की हर उम्र में हसीन हो

जो दिल लगाया आपने, दिल की लगी समझिये
जो दिल्लगी की है अगर, टूटे दिल में ना उलझिए 

Sunday, December 12, 2021

इश्क़ की दिशा


इक दिशा मिली है आज हमें 
चलना चाहें हम जिस ओर 
आ जा साथी हाथ पकड़ ले 
फिर इश्क़ करें पुरज़ोर 

जिस दिशा में तू ले जाना चाहे 
मैं जाऊंगा तेरे साथ 
सीने से लग जाए तू गर 
ना लब पर रखना हाथ 

मिल जाने दे लबों को अपने 
मेरे लबों के संग 
जानें हम इक दूजे को जब 
मिले अंग से अंग 

दुनिया की ना सोच तू ज्यादा 
दुनिया है बेकार 
जो पूछेगी तू लोगों से तो 
लोग करें इनकार 

क्या कहेंगे लोग मगर 
जब पता उन्हें चल जाए 
ना मैं बोलूं ना तू बोले 
ना कभी पता चल पाए 

सुन तू धड़कन दिल की 
मन की कर तू जब भी चाहें 
भेजे की मत सुनना जब भी 
दिल से निकले आहें 

कहे प्रवीण हर युवक इश्क़ में 
वो सब कुछ कर डालें 
मन में कुछ भी रखना ना है 
शंका क्यों हम पालें 

Saturday, December 11, 2021

आ तुझे आज जीना सिखा दूं


आ तुझे आज जीना सिखा दूं 
गमों को अपने पीना सिखा दूं 

दिलबर से जा तू 
सीने से लगकर 
आंखों में अपने
मोहब्बत सुलग कर 
भेजे की ना सुन तू 
दिल से सुलह कर 
जो दिल में आए वो करना सिखा दूं 

आ तुझे आज जीना सिखा दूं 
गमों को अपने पीना सिखा दूं 

दिल की जंजीरों को 
झिटक कर तू तोड़े 
लोगों की बातों को 
कस कर झिंझोरे 
तोड़े तू उन सारी
भी बेरियों को 
उनकी इजाजत को लांघना सिखा दूं 

आ तुझे आज जीना सिखा दूं 
गमों को अपने पीना सिखा दूं 

ना सोच अपने बेगाने हुए हैं 
बेगाने थे पहले, नकाबों के पीछे 
दरियादिली से वो सहमे हुए हैं 
शैतान हैं सब, तेरे खूं से सींचे 
पहचान सबको ना बर्बाद कर तू 
जीवन को अपने, डोरों में खींचे 
खुद को जला कर शहादत की आदत मिटा दूं 

आ तुझे आज जीना सिखा दूं 
गमों को अपने पीना सिखा दूं 

ना रोक दिल को धड़कने दे धक धक 
जा मिल झपट कर जिन पर तेरा हक 
जो तेरी राहों में आंखें बिछाए 
जीवन में उनके ना तेरे सिवाय 
खनका कर चूड़ी, लबों को सटा कर
सिमट जा तू बाहों में उनके खता कर 
आ तुझको मोहब्बत मैं करना सिखा दूं 

आ तुझे आज जीना सिखा दूं 
गमों को अपने पीना सिखा दूं 

Thursday, December 9, 2021

मुझे प्यार कर

ना समझ सका 

ना कह सका 

वो कह गईं 

जो कहना था 

जो था नहीं 

तो गम है क्यों 

मैं हूं यहां 

पर गुम हूं क्यों 

यहीं कहीं 

पे दिल मेरा 

चुरा लिया 

दिया नहीं 

कहा मुझे 

मैं तेरी हूं 

लिपट गई 

वो सीने से 

सिमट गई 

वो सांसों में 

यूं बंध गया 

मैं जान कर 

क्यूं रुंध गया 

गला मेरा 

जो वो गई 

यूं छोड़ कर 

भला बुरा 

सब बोल कर 

ना दिल धड़क 

रहा मेरा 

पर दिल तड़प 

रहा है क्यों 

क्यों ढूंढते 

नयन मेरे 

उन्हें अभी 

भी भीड़ में 

वो काश यूं हीं 

फिर हसाए 

या दिल करे 

तो फिर रुलाए 

या मुंह फुलाए 

रूठ जाए 

मैं मनाऊं 

फिर उसे 

लिपट के मुझसे 

फुस फुसाए 

कानों में 

कोई प्यारी बात 

बोल कर 

मुझे चिढ़ाए 

में चिढ़ जो जाऊं 

आंखों से 

वो आशिकी 

दम भर सिखाए 

हाय, रूक जा तू 

ना जा कहीं 

मेरे पास रह 

मेरी जिंदगी 

जी लूं तुझे 

हर सांस में 

पी लूं तुझे 

फिर भी यूं ही 

प्यासा रहूं 

तेरी आस में 

ना देर कर 

आ जा अभी 

मुझमें सिमट 

मुझसे लिपट 

लब को तेरे 

लब से चिपट 

हम इक बदन 

हो कर रहें 

इक दूसरे में 

खो कर रहें 

बस प्यार कर 

मुझे प्यार कर 

दीदार दे

दिलदार कर 

मुझे प्यार कर ।

Wednesday, December 8, 2021

दिल के तार

कभी झनक झनक, 

कभी खनक खनक 

कभी हँस कर 

आंखें मटक मटक 

कभी गुस्सा बातों बातों में 

कभी होठों पे मन का गुबार 

कभी सीने से वो लिपट लिपट 

कभी पकड़ो हाथ तो झिटक झिटक 

कभी बातें होती सिसक सिसक 

कभी सोती मेरे कंधे पर 

कभी जाती फिर वो खिसक खिसक 

कभी पुचकारे वो हिलस हिलस 

कभी झट पट, खट खट खड़काती 

कभी सिरहाने वो सरकाती 

कभी प्यार से कानों में कुहु कुहु 

कभी सीने में भर अंगारे 

भड़के और भरती हुंकारें 

कभी लबों को मेरे लब से सिल 

कभी हिरणी बन चंचल चंचल 

मनचली वो करती मनमानी 

कभी मिलती कर सोलह श्रृंगार 

कभी सामाजिक बंधन को पार 

जब करती वो ये सब कुछ तो 

समझो जुड़ गए हैं दिल के तार 

समझो जुड़ गए हैं दिल के तार 

समझो जुड़ गए हैं दिल के तार 

Friday, November 26, 2021

आ गले लग जा

काश लिपटी रहे तू हमेशा यूं ही 

और हम भी सिरहाने में सोए रहें 

सांसें तेरी मेरी साथ यूं हीं मिले 

जिंदगी की रवानी में बहते रहें 

कभी मैं जो करूं तुझसे गुस्ताखियां 

तू नाराजगी यूं हीं जताया करे 

फिर मुझे माफ कर मेरे सीने से लग 

मोहब्बत के धुन गुनगुनाया करे 

जब तेरा मन करे मुझको तू याद कर 

हम अकेले में वक्त गुजारा करें 

नर्म आहें तेरी गर्म सांसें मेरी 

यूं ही मिलकर जवानी बिताया करें 

छोड़ कर दुनिया की सारी दस्तूर तू

बस यूं हीं मुझमें समाया करे 

या खुदा तेरी नीयत का अंदाज तो 

तेरी आंखें बयां यूं हीं करती रहें 

काश लिपटी रहे तू हमेशा यूं ही 

और हम भी सिरहाने में सोए रहें 

Wednesday, November 24, 2021

चाहत

ओस की बुंदों को मैं 

पानी समझ गहरा था 

जिस दिल से प्यास सदियों कि बुझती 

उस पर तेरा पहरा था 


पहरा हटा कर देख जानम 

दुनिया बड़ी रंगीन है 

दिल चुरा कर तोड़ने का 

जुर्म पर संगीन है 


जुर्म ऐसे हम न करते 

दिल की देखी झांकियां

कर लो यकीं कि हम भी समझें

इश्क की बारीकियां 


इश्क की बारीकियों को 

समझे कोई सदियों तलक में 

हम वो आशिक हैं जो 

करते परख बस इक झलक में 


इक झलक अब आप की

गर हुस्न की ओ मल्लिका 

देख लें नज़रों से अपनी 

तो छोड़ दें अट्टालिका 


छोड़ दूं दुनिया को पीछे 

हम अगर मिलते रहें 

जिस्म हो या चाहतों के 

फूल यूं खिलते रहें ।

Tuesday, November 23, 2021

खुशनुमा

खुशनुमा मौसम है, कहीं दिल खो गया है 

संभालो यारा मुझको, मैने कुछ तो पी लिया है 

होंठ गुलाबी से तेरे, मुझसे मिल गए जब
धड़कनें धड़कती रहती, बस में ये नहीं अब 

सीने से, तेरे लगते तन में, बिजली दौड़ती हैं 
आग जो लगी है वो, बुझाए ना बुझती है 

क्या किया है जानेमन, ये मुझको तू बता दे 
दिल चुरा ना मेरा कोई, और ही सजा दे 

गर चुराया दिल को मेरे, पास अपने रखना 
बातें ऐसी वैसी करके, मुझको ना परखना 

हफ्ता मिले हुए अभी, साल दशक बाकी 
सैर चांद की कराई, तुमने मुझे साकी 

बंधनों को तोड़ देना, रिश्ते हों या नाते 
किस्मतों के खेल में हम, काश तेरे हो पाते 

यार मेरे मिलते रहना, आज जैसे यूं हीं
माफ करना गलतियों को, बड़ी हो कितनी क्यूं हीं।

Monday, November 22, 2021

मशरूफ

 इस बेजुबान दिल पे रहम कीजे

होंठ जो अर्ज नहीं कर पा रहे 

वो बिन कहे भी समझ लीजे 


ये हमारी गुजारिश है जरा सुन लीजे 

दीदार ए महबूबा हो ऐसी ख्वाहिश 

है परवाने की, कभी रहम कीजे 


नज़रों को जरा और पास आने दीजे

होठों को तकल्लुफ क्यों देना 

सांसों से ही अर्ज किया कीजे 


हर शाम हम पे दीदार की इनायत कीजे

दिल कह रहा है आप मशरूफ कहीं हों तो 

हमें अपने पास हाजिरी को बुलाया कीजे ।

नज़र - ए - इनायत

कह दो ज़माने से दीवाने हुए हम 

परवाने जलते थे कभी हम नहीं हैं कम |

सूरज निकलने से पहले दस्तक कई बार

खटखटाये दिल कि धड़कन और उनके द्वार |


मोहब्बत न कर बैठें ये डर उन्हें सताता 

कोई उन्हें बताये हमें और कुछ न आता |

ये दिल की आग है जो बुझाये ना बुझे 

लपटों में ज़िंदगी है कुछ सुझाये ना सूझे |


वक़ालत करें वो जम के डरती नहीं किसी से 

अदालत हों शहर वाले या इश्क़ आशिकी के |

फ़िदा हैं उनपे हम भी बस इक नज़र कि प्यास है 

होगी इनायत जल्दी यह जिगर को आस है |

Sunday, November 21, 2021

इश्क

लब उनके जब मेरे लबों से सिल गए 

रंगीनियों में हम दोनो मिल गए 
मुखरा उनका सुर्ख हो गया
गुस्ताखियों में फिर मैं खो गया 

हाथ उनके मेरे कंधों पर 
मेरे उनके कमरबंद हो गए 
सीने से जब वो लग जाती हैं 
सासें उनकी चढ़ जाती हैं 

आंखों में उनके शैतानियां 
मुझमें बिजली दौड़ाती हैं 
मैं उनसे लिपट जाता हूं 
जिस्म दोनो सिमट जाते हैं 

घंटों वो हमसे लिपटी हुई
और मैं उनसे लिपटा हुआ 
चीखें धीरे से मुस्कान में 
मेरे कानो में कह जाती हैं 

धीरे धीरे से करते रहो 
तेज रफ्तार कभी बीच में 
होता तो जिस्म कस जाते हैं 
इश्क यूं हीं होता सनम
दो बदन में दिल फस जाते हैं 

Saturday, November 20, 2021

जवानी

छोटी छोटी ख्वाहिशें, 

छोटे हैं सपने 

देख देख दिल खुश होता, 

जब भी मिलते अपने 


अलस सुबह की, चाय भगाती 

लिपटे तुम, मेरे तन मन में 

कैसे भगाऊं मोरी राधा 

तेरी प्यास की अगन, कण कण में 


वक्त मिले, होठों को अपने 

मेरे होठों पर रख देना 

प्यास लबों की बुझ ना पाए 

धड़कन भी फिर तुम सुन लेना 


मिलने दो अपने तन को मेरे तन से

सिहरन को बस चलने दो 

जो तुफां है वो मचल रही 

ना रोको उन्हें मचलने दो 


बस दिन हैं चार जवानी के 

फिर सोचें क्यूं, क्या सही गलत 

जो दिल आए, वो कर डालें 

दिन रात तू बस अब आ के लिपट ।

Friday, November 19, 2021

प्रेरणा

मैं, कौन हूं, क्यूं हूं, और कहां हूं

पूछूं, यही, इन फिज़ा, और हवा से

क्यूं, दिख रहा, ये शमा, गुलिस्तां सा

दिल, ये बता, तू मिला, है क्या उनसे


यूं, लग रहा, क्यूं मुझे, उनसे मिलकर

जैसे कोई, जाना जाना, सा हो

लेकिन कोई, बिलकुल ही, नया सा

धड़कन मेरी, बातें सुनती नहीं


आंखों में, उनके, मैं देखूं शरारत

हंसती वो, ऐसे कि, करना बयां

मुश्किल नहीं, मुमकिन हीं, नहीं हो

दिल अब बता, क्या करूं, इस खता का


वो हमसे, मिलकर, गले से लगाएं

या फिर, मुझे चूमें, मुस्कराएं

हर इक, पल, जिंदगी, कि ये मेरी

धड़कें, या फिर, धड़कने, सो जाएं 


खुशियों, से, हम, भर जाएं 

और बातें, कर, जाएं,

उनकी, बातें, सुनने, जाएं 

पर, अपनी, कह, जाएं 


जब, तक, साथ, रहें, वो, हम 

बस, इतना, दिल, चाहें 

हम, उनके, और, वो, मेरे 

हो, कर, रह, जाएं 

Saturday, October 23, 2021

दिल की धड़कनें 

रात अभी बाकी थी , सुबह को थामे, 

चाँद अभी ठहरा था, ठहरी थी शामें, 

ओस की बूंदें थीं, घासों के लब पर,

हमसे अलग हैं वो, हमको तलब कर | 


कुछ तो था कहना, ऐसा है कहता 

दिल मेरा, उनकी पनाहों में रहता,

पलकें उठाती, तो चलते थे खंजर

यूं मानो, हज़ारों ने छेदा हो पंजर।


न कह पाया अपनी कहानी ज़ुबां से, 

फ़साने पुराने, या किस्से नवा से,

दिल की धड़कनें, धड़कती रहीं हैं,

शोलों की तरह भड़कती रहीं हैं। 


हमारी कहानी कोई जी रहा है , 

मेरा अच्छा होना, मुझे पी रहा है,

वो खुश हैं, किसी और की ज़िन्दगी में,

रूह मेरी, बहानों में यूं घुल रहा है। 

Tuesday, September 17, 2019

आखर प्रेम है आधे का

आखर प्रेम है आधे का

सन सनन जो हवा चले
और झूम के जो बारिश आए

तो लेना समझ मैं आया था
तेरे दिल में कहीं समाया था

जो आग लगा दे तन मन में
और आश जगा दे कण कण में

वो प्रेम पुजारी चिंगारी
तेरे ना पर हर पल जो भारी

जिसे पल पल तुमने दूर किया
वही चोर ले गया तेरा हिया

अब खुद को तुम ना बंधन में
रखना मन को ना चिंतन में

बस सिमट के बाहों के अंदर
आलिंगन कर और चुम्बन कर

तुम प्रेम भाव को प्रकट करो
प्रेमी को अपने निकट करो

यह देश है कृष्ण ओ राधे का
और आखर प्रेम है आधे का

मन भाव प्यार में तरता है
जो इस डगरी पर चलता है।

बताओ तुम कब तक याद रखोगे मुझे

बताओ तुम कब तक याद रखोगे मुझे 

मैं खुद को अक्सर भूल जाता हूँ,
बताओ तुम कब तक याद रखोगे मुझे

कभी बाँहों में मेरे जो आओ कभी
धड़कनो की कहानी सुनाओ मुझे

आँखें पढ़ ली बहोत तेरी मैंने अभी
दिल के दरिया में गोते लगाने दो मुझे

सांसें चलती हैं सरपट तेरे छूने से मेरी
अपने सीने में अब सिमटने दे मुझे

बात दिल में छुपा कर रखी है कोई
बात तेरे लबों से करने दे मुझे .....


Wednesday, April 24, 2019

इश्कबाजी

उल्फतों के दौर में हम तनहा हैं
और वो कहीं भीड़ में खोये हुए से

हम हैं जिन्हे रातों को नींद नहीं आती
और वो सपनो की दुनिया में सोये हुए से

हम उनके इक दीदार को तरसे हुए हैं
और वो अपने अश्कों में दीपक संजोये हुए से

इश्कबाजी की ज़ुर्रत कितना भी कर लें
पर वो अपनी धुन में हीं उलझे हुए से