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Sunday, December 19, 2021

छोटे छोटे ख्वाब


छोटे छोटे ख्वाब हैं मेरे 
छोटा है आशमां 
छोटी सी है दुनिया मेरी 
छोटे हैं अरमां 

बड़ी बड़ी सी आशाएं हैं 
बड़ा है दिल पर बोझ 
बड़ी बड़ी सी जिम्मेदारी
बड़ी हमारी सोच 

छोटी छोटी ख्वाहिश मेरी 
छोटी अभिलाषाएं 
छोटे छोटे कदम बढ़ाते 
पार करें बाधाएँ 

बड़ी बड़ी बाधाएँ होंगी 
बड़े से होंगे लोग 
बड़े लगाएं अड़ंगे पथ में 
करें वो तेरा भोग 

छोटे समझ कर उनको तुम ना 
ठेस लगे तो गिरना 
तुम्हें गिराएं बार बार बन 
चट्टान ना हिलना 

छोटी अपनी गर्दन रखना 
छोटी अपनी चाहत 
बड़े बड़ों का मर्दन करती  
अहंकार की आहट 

सर ना कभी भी झुकने देना 
और आँखें रखना नीचे 
बड़ों को अपने इज़्ज़त देना 
देख के छोटे सीखें 

छोटी छोटी बातों को तुम 
अहमियत ना देना 
भूल अगर हो जाए तुमसे 
माफ़ करो ये कहना 

कल को तुम गर बड़े हो जाओ 
और दोस्त रह गए छोटे 
दिल को अपने बड़ा हीं रखना 
दोस्त ना होते खोटे 

दोस्त अगर हो जाएं बड़े, पर 
रह जाओ तुम छोटे, 
माफ़ उन्हें कर देना तुम, गर 
वो हँसते, तुम जब रोते 

बातें कोई चुभने वाली 
करता कोई तेरा यार 
हँस कर भुला दो तुम तुरंत 
ये होता सदव्यवहार 

दूजों पर ना उठे ये ऊँगली 
कर लिया था प्रवीण ने प्रण 
लिया प्रेरणा यारों पे कर 
तन मन धन अर्पण 

Saturday, December 18, 2021

पलकें ना झुकाएं मोहतरमा


पलकें ना झुकाएं मोहतरमा 
कहीं रात अँधेरी हो जाए ना 

जुल्फों को ना अपने सुलझाओ 
कहीं बात अधूरी रह जाए ना 

यूं बातों पर मेरे हसना मत 
कहीं और मुलाकात दिल चाहे ना 

हाथों से ना जुल्फें छूना तुम 
कहीं  दीवानें सब बन जाए ना 

गालों की लाली छुपा लो तुम 
कहीं चाँद अभी शरमा जाए ना 

होठों को ना अपने हिलाएं आप 
कहीं दिल की धड़कन रुक जाए ना 

जाने की बात ना छेड़ा करो 
कहीं दुनिया मेरी ढह जाए ना 

पलकें ना झुकाएं मोहतरमा 
कहीं इज़हार - ए - इश्क़ हम कर जाए ना 

Monday, December 13, 2021

इश्क़ नहीं मिटता


जर्रे जर्रे में तेरी महक और साँसों की खुशबू हवाओं में 
ऐ सनम हम तुम्हें कैसे बताएं क्या मिला है फ़िज़ाओं में 

तेरे सवाल हमारे मिलने पर उँगलियाँ जब उठाते हैं 
क्या बताऊँ जहन में तब खयालात बुरे सताते हैं 

क्यों वही तड़प तुझमें नहीं जो डसती है मेरे सीने में 
क्या मोहब्बत सिर्फ हमनें की यूं इश्क़ के महीने में ?

इश्क़ उम्र का मोहताज नहीं होता है जनाब 
इश्क़ में धड़कनें सुनिए, ना रखिये उसका हिसाब 

इश्क़ वो बला है जो बिन बुलाये आ जाए 
दिल टूटने के बाद भी जो रुके और सज़ा पाए 

मिट गए सब इश्क़ करने वाले इतिहास की किताबों में 
पर इश्क़ ना मिटा था उनका और ना मिटेगा इन हवाओं में 

कभी कभी अपने मोहब्बत से मिल कर तो देखिये आप
नज़रों की चमक और दिल की धड़कनें दोनों हीं बढ़ती हैं जनाब 

प्रवीण हों आप इश्क़ में या फिर कोई नवीन हो
प्रेरणा इस इश्क़ की हर उम्र में हसीन हो

जो दिल लगाया आपने, दिल की लगी समझिये
जो दिल्लगी की है अगर, टूटे दिल में ना उलझिए 

Saturday, December 11, 2021

परवाने


क्या छुपी बात है जुबां पर ये बता दीजै
दिल कह रहा क्या जाएं कहां वो पता दीजै 

हम तो आशिक हैं अश्कों से वफा कीजै 
कभी दीदार करने वालों को ना दफा कीजै 

उफ़ ये गुस्ताखियां हमारी हम से सभलती हीं नहीं 
आशिक हैं आपके हमें माफीनामा दे दें कभी कभार कहीं 

हुस्न तो होती हैं बाजार में भी बहोत ए शहजादी 
पर आपके हुस्न पर फिदा है इस दिल की आजादी 

कैद कर लें हमें अभी इस वक्त सजा दीजै 
आपके इश्क में दीवाने हुए हम हमें विदा कीजै 

शम्मा जलती है परवाने को जलाने को हीं 
हम भी परवाने हैं हमें जलने की इजाजत दीजै 

आ तुझे आज जीना सिखा दूं


आ तुझे आज जीना सिखा दूं 
गमों को अपने पीना सिखा दूं 

दिलबर से जा तू 
सीने से लगकर 
आंखों में अपने
मोहब्बत सुलग कर 
भेजे की ना सुन तू 
दिल से सुलह कर 
जो दिल में आए वो करना सिखा दूं 

आ तुझे आज जीना सिखा दूं 
गमों को अपने पीना सिखा दूं 

दिल की जंजीरों को 
झिटक कर तू तोड़े 
लोगों की बातों को 
कस कर झिंझोरे 
तोड़े तू उन सारी
भी बेरियों को 
उनकी इजाजत को लांघना सिखा दूं 

आ तुझे आज जीना सिखा दूं 
गमों को अपने पीना सिखा दूं 

ना सोच अपने बेगाने हुए हैं 
बेगाने थे पहले, नकाबों के पीछे 
दरियादिली से वो सहमे हुए हैं 
शैतान हैं सब, तेरे खूं से सींचे 
पहचान सबको ना बर्बाद कर तू 
जीवन को अपने, डोरों में खींचे 
खुद को जला कर शहादत की आदत मिटा दूं 

आ तुझे आज जीना सिखा दूं 
गमों को अपने पीना सिखा दूं 

ना रोक दिल को धड़कने दे धक धक 
जा मिल झपट कर जिन पर तेरा हक 
जो तेरी राहों में आंखें बिछाए 
जीवन में उनके ना तेरे सिवाय 
खनका कर चूड़ी, लबों को सटा कर
सिमट जा तू बाहों में उनके खता कर 
आ तुझको मोहब्बत मैं करना सिखा दूं 

आ तुझे आज जीना सिखा दूं 
गमों को अपने पीना सिखा दूं 

Wednesday, December 8, 2021

दिल के तार

कभी झनक झनक, 

कभी खनक खनक 

कभी हँस कर 

आंखें मटक मटक 

कभी गुस्सा बातों बातों में 

कभी होठों पे मन का गुबार 

कभी सीने से वो लिपट लिपट 

कभी पकड़ो हाथ तो झिटक झिटक 

कभी बातें होती सिसक सिसक 

कभी सोती मेरे कंधे पर 

कभी जाती फिर वो खिसक खिसक 

कभी पुचकारे वो हिलस हिलस 

कभी झट पट, खट खट खड़काती 

कभी सिरहाने वो सरकाती 

कभी प्यार से कानों में कुहु कुहु 

कभी सीने में भर अंगारे 

भड़के और भरती हुंकारें 

कभी लबों को मेरे लब से सिल 

कभी हिरणी बन चंचल चंचल 

मनचली वो करती मनमानी 

कभी मिलती कर सोलह श्रृंगार 

कभी सामाजिक बंधन को पार 

जब करती वो ये सब कुछ तो 

समझो जुड़ गए हैं दिल के तार 

समझो जुड़ गए हैं दिल के तार 

समझो जुड़ गए हैं दिल के तार 

Monday, November 22, 2021

नज़र - ए - इनायत

कह दो ज़माने से दीवाने हुए हम 

परवाने जलते थे कभी हम नहीं हैं कम |

सूरज निकलने से पहले दस्तक कई बार

खटखटाये दिल कि धड़कन और उनके द्वार |


मोहब्बत न कर बैठें ये डर उन्हें सताता 

कोई उन्हें बताये हमें और कुछ न आता |

ये दिल की आग है जो बुझाये ना बुझे 

लपटों में ज़िंदगी है कुछ सुझाये ना सूझे |


वक़ालत करें वो जम के डरती नहीं किसी से 

अदालत हों शहर वाले या इश्क़ आशिकी के |

फ़िदा हैं उनपे हम भी बस इक नज़र कि प्यास है 

होगी इनायत जल्दी यह जिगर को आस है |

Sunday, November 21, 2021

इश्क

लब उनके जब मेरे लबों से सिल गए 

रंगीनियों में हम दोनो मिल गए 
मुखरा उनका सुर्ख हो गया
गुस्ताखियों में फिर मैं खो गया 

हाथ उनके मेरे कंधों पर 
मेरे उनके कमरबंद हो गए 
सीने से जब वो लग जाती हैं 
सासें उनकी चढ़ जाती हैं 

आंखों में उनके शैतानियां 
मुझमें बिजली दौड़ाती हैं 
मैं उनसे लिपट जाता हूं 
जिस्म दोनो सिमट जाते हैं 

घंटों वो हमसे लिपटी हुई
और मैं उनसे लिपटा हुआ 
चीखें धीरे से मुस्कान में 
मेरे कानो में कह जाती हैं 

धीरे धीरे से करते रहो 
तेज रफ्तार कभी बीच में 
होता तो जिस्म कस जाते हैं 
इश्क यूं हीं होता सनम
दो बदन में दिल फस जाते हैं 

Saturday, November 20, 2021

जवानी

छोटी छोटी ख्वाहिशें, 

छोटे हैं सपने 

देख देख दिल खुश होता, 

जब भी मिलते अपने 


अलस सुबह की, चाय भगाती 

लिपटे तुम, मेरे तन मन में 

कैसे भगाऊं मोरी राधा 

तेरी प्यास की अगन, कण कण में 


वक्त मिले, होठों को अपने 

मेरे होठों पर रख देना 

प्यास लबों की बुझ ना पाए 

धड़कन भी फिर तुम सुन लेना 


मिलने दो अपने तन को मेरे तन से

सिहरन को बस चलने दो 

जो तुफां है वो मचल रही 

ना रोको उन्हें मचलने दो 


बस दिन हैं चार जवानी के 

फिर सोचें क्यूं, क्या सही गलत 

जो दिल आए, वो कर डालें 

दिन रात तू बस अब आ के लिपट ।

Friday, November 19, 2021

प्रेरणा

मैं, कौन हूं, क्यूं हूं, और कहां हूं

पूछूं, यही, इन फिज़ा, और हवा से

क्यूं, दिख रहा, ये शमा, गुलिस्तां सा

दिल, ये बता, तू मिला, है क्या उनसे


यूं, लग रहा, क्यूं मुझे, उनसे मिलकर

जैसे कोई, जाना जाना, सा हो

लेकिन कोई, बिलकुल ही, नया सा

धड़कन मेरी, बातें सुनती नहीं


आंखों में, उनके, मैं देखूं शरारत

हंसती वो, ऐसे कि, करना बयां

मुश्किल नहीं, मुमकिन हीं, नहीं हो

दिल अब बता, क्या करूं, इस खता का


वो हमसे, मिलकर, गले से लगाएं

या फिर, मुझे चूमें, मुस्कराएं

हर इक, पल, जिंदगी, कि ये मेरी

धड़कें, या फिर, धड़कने, सो जाएं 


खुशियों, से, हम, भर जाएं 

और बातें, कर, जाएं,

उनकी, बातें, सुनने, जाएं 

पर, अपनी, कह, जाएं 


जब, तक, साथ, रहें, वो, हम 

बस, इतना, दिल, चाहें 

हम, उनके, और, वो, मेरे 

हो, कर, रह, जाएं 

Saturday, February 22, 2020

मेरी मेहबूबा मेरी दोस्त

मेरी मेहबूबा मेरी दोस्त

हम उनके लिए सुबह नाश्ता, दोपहर का खाना और शाम की चाय बनाएं
हम उन्हें दिन भर की अपनी दास्तान सुनाएं
दर्द होने पर उनको अपने सीने से लगाएं
नींद ना आने पर उनके सो जाने तक उनको सहलाएं
चोट लगने पर उनकी सिसकियों को चुप करवाएं
उनके खुश होने पर खुशी से फूले ना समाएं
मिर्च लगने पर उनके लिए खुद की मिठाई खिलाएं
काम बिगड़ जाने पर साथ बैठ कर हाथ बटाएं
उनके मां बाबा से उनके पसंद नापसंद फोन पर लिखवाएं
हर सुबह उनको चुपके से चूम कर प्यार से उठाएं
रंग बिरंगे कपड़े, जूते, गहने, जेवर उनको पहनाएं
उनकी सुंदरता उनको अपनी कविताओं में गा कर सुनाएं
उनके गिरने पर उनको अपना सहारा दें और उठाएं
चाय कॉफी के साथ उनको सनफीस्ट के चिप्स खिलाएं
उनको खुश करने को उनकी हाथों की रेखाएं उनको दिखाएं
उनके हौले से मुस्कुराने भर से अपने दिल में तूफ़ान जगाएं
उनकी छोटी छोटी चुटकुलों पर ठहाके मार कर हसें और हसाएं
किसी दोस्त से अनबन होने पर उनको समझाएं
ना समझने पर उनके दोस्तों को शैतान बनाएं
उनकी आंखों में अपनी अलग दुनिया बसाएं
उनके गुस्से पर अपना सब कुछ हार जाएं
उनके इशारों पर बिना हॉर्न बजाए गाड़ी धीमे चलाएं,
सर्दियों में उनको कम्बल ओढाएं, गर्मियों में चादर हटाएं
उनके चेहरे की बूंदों को ठंडी हवाओं से सुखाएं
होठों पर उनके लिपस्टिक लगाएं, और पैरों में सैंडल
कभी कभी शाम को खाने पर जाएं जहां मेज पर हो कैंडल
प्यार से उनको जब तब गले लगाएं और हाथों पर कीकली चलाएं
ऐसी मेहबूबा मुझसे पूछती हैं कि वो हमसे दोस्ती में हैं
या किसी और को पूछें की मोहब्बत कैसे करवाएं।

Tuesday, February 18, 2020

इश्क़ के बोल

इश्क़ के बोल 

हम उन्हें आप कहें या कहें तुम
दिन इसी में निकल गया
दिल की बातें की कम

वो चालीस के और हम साल एक कम या ज्यादा
मन में उनके शंका है इश्क़ रहेगा आधा
रोमियो जूलिएट या मजनू लैला सा इश्क़ तो अब होता नहीं
राधा कृष्ण के मिलने के कम और किस्से बिछड़ने के हैं ज्यादा

चलो छोड़ो उमर को ए दोस्त दिल से मिलो गले
और कानों में मेरे कुछ ऐसा बोलो जो
उस कसक को मीठा कर दे जब तक ये रात ढले। 

Tuesday, September 17, 2019

आखर प्रेम है आधे का

आखर प्रेम है आधे का

सन सनन जो हवा चले
और झूम के जो बारिश आए

तो लेना समझ मैं आया था
तेरे दिल में कहीं समाया था

जो आग लगा दे तन मन में
और आश जगा दे कण कण में

वो प्रेम पुजारी चिंगारी
तेरे ना पर हर पल जो भारी

जिसे पल पल तुमने दूर किया
वही चोर ले गया तेरा हिया

अब खुद को तुम ना बंधन में
रखना मन को ना चिंतन में

बस सिमट के बाहों के अंदर
आलिंगन कर और चुम्बन कर

तुम प्रेम भाव को प्रकट करो
प्रेमी को अपने निकट करो

यह देश है कृष्ण ओ राधे का
और आखर प्रेम है आधे का

मन भाव प्यार में तरता है
जो इस डगरी पर चलता है।