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Sunday, February 23, 2020

बेचैन

क्यों दूर हो जाते हैं लोग पास हो कर भी
क्यों पास रहता है कोई जो दूर चला गया बरसों पहले
क्यों तड़पता है दिल उसके लिए जिसके सीने में दिल ही नहीं
क्यों धड़कनें देती हैं धोखा और धड़कती नहीं उसके लिए जो हमसे मोहब्बत का इकरार करता है
क्यों जिंदगी हसीन नहीं लगती हर रोज
क्यों जिंदगी के इंतज़ार में जीवन गुजर जाता है
क्यों दोस्तों की पुकार अनजान लगने लगती है
क्यों अनजाने बस यूं हीं कभी कभी अपने से लगने लगते हैं
क्यों आसमान कभी बहोत छोटा लगता है
क्यों कब्र कभी जिंदगी से ज्यादा बड़ी लगती है
क्यों हम तुम अकेले होते हैं सबके साथ होते हुए भी
क्यों चेहरे पर मुस्कुराहट होती है अंदर से रोते हुए भी
क्यों हाथ कोई थामे नहीं जब हमारी राहें सच्ची होती हैं
क्यों पैर फिसलते हमारे जब उम्र कच्ची होती है
क्यों नहीं रहे बचपन में हीं यूं हो गए बड़े अचानक से
क्यों लोगों की निगाहों में गिरने का डर रहता है
क्यों दिल की बात जुबां खुद हीं नहीं कहता है
क्यों खून बहने तक रिश्ते टूट जाते हैं
क्यों अपने हीं अपनों का खून भी बहाते हैं
या खुदा किन सवालों में तुमने हमको यहां डाला है
बेचैन सब हैं चारो तरफ बस तेरा ही हवाला है।

Saturday, February 22, 2020

मेरी मेहबूबा मेरी दोस्त

मेरी मेहबूबा मेरी दोस्त

हम उनके लिए सुबह नाश्ता, दोपहर का खाना और शाम की चाय बनाएं
हम उन्हें दिन भर की अपनी दास्तान सुनाएं
दर्द होने पर उनको अपने सीने से लगाएं
नींद ना आने पर उनके सो जाने तक उनको सहलाएं
चोट लगने पर उनकी सिसकियों को चुप करवाएं
उनके खुश होने पर खुशी से फूले ना समाएं
मिर्च लगने पर उनके लिए खुद की मिठाई खिलाएं
काम बिगड़ जाने पर साथ बैठ कर हाथ बटाएं
उनके मां बाबा से उनके पसंद नापसंद फोन पर लिखवाएं
हर सुबह उनको चुपके से चूम कर प्यार से उठाएं
रंग बिरंगे कपड़े, जूते, गहने, जेवर उनको पहनाएं
उनकी सुंदरता उनको अपनी कविताओं में गा कर सुनाएं
उनके गिरने पर उनको अपना सहारा दें और उठाएं
चाय कॉफी के साथ उनको सनफीस्ट के चिप्स खिलाएं
उनको खुश करने को उनकी हाथों की रेखाएं उनको दिखाएं
उनके हौले से मुस्कुराने भर से अपने दिल में तूफ़ान जगाएं
उनकी छोटी छोटी चुटकुलों पर ठहाके मार कर हसें और हसाएं
किसी दोस्त से अनबन होने पर उनको समझाएं
ना समझने पर उनके दोस्तों को शैतान बनाएं
उनकी आंखों में अपनी अलग दुनिया बसाएं
उनके गुस्से पर अपना सब कुछ हार जाएं
उनके इशारों पर बिना हॉर्न बजाए गाड़ी धीमे चलाएं,
सर्दियों में उनको कम्बल ओढाएं, गर्मियों में चादर हटाएं
उनके चेहरे की बूंदों को ठंडी हवाओं से सुखाएं
होठों पर उनके लिपस्टिक लगाएं, और पैरों में सैंडल
कभी कभी शाम को खाने पर जाएं जहां मेज पर हो कैंडल
प्यार से उनको जब तब गले लगाएं और हाथों पर कीकली चलाएं
ऐसी मेहबूबा मुझसे पूछती हैं कि वो हमसे दोस्ती में हैं
या किसी और को पूछें की मोहब्बत कैसे करवाएं।

Tuesday, September 17, 2019

आखर प्रेम है आधे का

आखर प्रेम है आधे का

सन सनन जो हवा चले
और झूम के जो बारिश आए

तो लेना समझ मैं आया था
तेरे दिल में कहीं समाया था

जो आग लगा दे तन मन में
और आश जगा दे कण कण में

वो प्रेम पुजारी चिंगारी
तेरे ना पर हर पल जो भारी

जिसे पल पल तुमने दूर किया
वही चोर ले गया तेरा हिया

अब खुद को तुम ना बंधन में
रखना मन को ना चिंतन में

बस सिमट के बाहों के अंदर
आलिंगन कर और चुम्बन कर

तुम प्रेम भाव को प्रकट करो
प्रेमी को अपने निकट करो

यह देश है कृष्ण ओ राधे का
और आखर प्रेम है आधे का

मन भाव प्यार में तरता है
जो इस डगरी पर चलता है।