Monday, November 22, 2021

नज़र - ए - इनायत

कह दो ज़माने से दीवाने हुए हम 

परवाने जलते थे कभी हम नहीं हैं कम |

सूरज निकलने से पहले दस्तक कई बार

खटखटाये दिल कि धड़कन और उनके द्वार |


मोहब्बत न कर बैठें ये डर उन्हें सताता 

कोई उन्हें बताये हमें और कुछ न आता |

ये दिल की आग है जो बुझाये ना बुझे 

लपटों में ज़िंदगी है कुछ सुझाये ना सूझे |


वक़ालत करें वो जम के डरती नहीं किसी से 

अदालत हों शहर वाले या इश्क़ आशिकी के |

फ़िदा हैं उनपे हम भी बस इक नज़र कि प्यास है 

होगी इनायत जल्दी यह जिगर को आस है |

Sunday, November 21, 2021

इश्क

लब उनके जब मेरे लबों से सिल गए 

रंगीनियों में हम दोनो मिल गए 
मुखरा उनका सुर्ख हो गया
गुस्ताखियों में फिर मैं खो गया 

हाथ उनके मेरे कंधों पर 
मेरे उनके कमरबंद हो गए 
सीने से जब वो लग जाती हैं 
सासें उनकी चढ़ जाती हैं 

आंखों में उनके शैतानियां 
मुझमें बिजली दौड़ाती हैं 
मैं उनसे लिपट जाता हूं 
जिस्म दोनो सिमट जाते हैं 

घंटों वो हमसे लिपटी हुई
और मैं उनसे लिपटा हुआ 
चीखें धीरे से मुस्कान में 
मेरे कानो में कह जाती हैं 

धीरे धीरे से करते रहो 
तेज रफ्तार कभी बीच में 
होता तो जिस्म कस जाते हैं 
इश्क यूं हीं होता सनम
दो बदन में दिल फस जाते हैं 

Saturday, November 20, 2021

जवानी

छोटी छोटी ख्वाहिशें, 

छोटे हैं सपने 

देख देख दिल खुश होता, 

जब भी मिलते अपने 


अलस सुबह की, चाय भगाती 

लिपटे तुम, मेरे तन मन में 

कैसे भगाऊं मोरी राधा 

तेरी प्यास की अगन, कण कण में 


वक्त मिले, होठों को अपने 

मेरे होठों पर रख देना 

प्यास लबों की बुझ ना पाए 

धड़कन भी फिर तुम सुन लेना 


मिलने दो अपने तन को मेरे तन से

सिहरन को बस चलने दो 

जो तुफां है वो मचल रही 

ना रोको उन्हें मचलने दो 


बस दिन हैं चार जवानी के 

फिर सोचें क्यूं, क्या सही गलत 

जो दिल आए, वो कर डालें 

दिन रात तू बस अब आ के लिपट ।

Friday, November 19, 2021

प्रेरणा

मैं, कौन हूं, क्यूं हूं, और कहां हूं

पूछूं, यही, इन फिज़ा, और हवा से

क्यूं, दिख रहा, ये शमा, गुलिस्तां सा

दिल, ये बता, तू मिला, है क्या उनसे


यूं, लग रहा, क्यूं मुझे, उनसे मिलकर

जैसे कोई, जाना जाना, सा हो

लेकिन कोई, बिलकुल ही, नया सा

धड़कन मेरी, बातें सुनती नहीं


आंखों में, उनके, मैं देखूं शरारत

हंसती वो, ऐसे कि, करना बयां

मुश्किल नहीं, मुमकिन हीं, नहीं हो

दिल अब बता, क्या करूं, इस खता का


वो हमसे, मिलकर, गले से लगाएं

या फिर, मुझे चूमें, मुस्कराएं

हर इक, पल, जिंदगी, कि ये मेरी

धड़कें, या फिर, धड़कने, सो जाएं 


खुशियों, से, हम, भर जाएं 

और बातें, कर, जाएं,

उनकी, बातें, सुनने, जाएं 

पर, अपनी, कह, जाएं 


जब, तक, साथ, रहें, वो, हम 

बस, इतना, दिल, चाहें 

हम, उनके, और, वो, मेरे 

हो, कर, रह, जाएं 

Thursday, November 18, 2021

श्रद्धांजलि

 श्रद्धांजलि

माता को श्रद्धांजलि

देती उनकी कोख

बैठी स्वर्ग से देखती

देव सके ना रोक।


तृप्त है उनकी आत्मा

बच्चे अपने देख

पूरी हो गई ख्वाहिशें

थे जो एक अनेक।


रखना अपने पिता को

देख रेख में बेटी

आशीर्वाद रहेगा मेरा

ऐसा वचन में देती।


रिश्तों को कर दे माफ तू

रिश्ते होते हैं अटूट

अनदेखी कर गलतियां

जब बोलें भी वो झूठ।


दिल तेरा है सागर सा

माता को है ज्ञान

आसूं में बह जाने दे

मन में जो हो मलान।

Saturday, October 23, 2021

दिल की धड़कनें 

रात अभी बाकी थी , सुबह को थामे, 

चाँद अभी ठहरा था, ठहरी थी शामें, 

ओस की बूंदें थीं, घासों के लब पर,

हमसे अलग हैं वो, हमको तलब कर | 


कुछ तो था कहना, ऐसा है कहता 

दिल मेरा, उनकी पनाहों में रहता,

पलकें उठाती, तो चलते थे खंजर

यूं मानो, हज़ारों ने छेदा हो पंजर।


न कह पाया अपनी कहानी ज़ुबां से, 

फ़साने पुराने, या किस्से नवा से,

दिल की धड़कनें, धड़कती रहीं हैं,

शोलों की तरह भड़कती रहीं हैं। 


हमारी कहानी कोई जी रहा है , 

मेरा अच्छा होना, मुझे पी रहा है,

वो खुश हैं, किसी और की ज़िन्दगी में,

रूह मेरी, बहानों में यूं घुल रहा है। 

Wednesday, August 4, 2021

खताएं

 वो तन्हा हैं, उनको है पता 

हम तन्हा हैं , ये सबको पता 


जो तुमने कहा, और हमने सुना 

खुशियों की खनक अंतर्मन में 


तेरे मेरे, थे कण कण में 

फिर बात हुई, पर साथ नहीं 

अब तू ही बता, के खता क्या है ?