Saturday, July 13, 2019

क्या ये सच है ?

क्या ये सच है कि मोहब्बत करके
जी लेते हैं वो इबादत करके ?

आहें भरते हैं वो तन्हाई में
गम ही तो है इश्क़ की गहराई में।

क्या ये सच है कि वो तसव्वुर में
हमसे लिपटे थे मोहब्बत करके?

होंठ हिलते ही सिल से जाते हैं
दीदार हो तो खिल से जाते हैं।

क्या ये सच है कि इश्क़ होता है
या होता है और खो जाता है ?

आग लगती है उनके सीने में
क्या मजा तनहा तनहा जीने में

क्या ये सच है कि जब वो मिलते हैं
चाहतें बढ़ती हैं पर दीवार नये खिलते हैं?


क्या ये सच है ?

ज़िंदगी एक दो पल की है, घंटों की नहीं।

ज़िंदगी एक दो पल की है, घंटों की नहीं।
आंखें अपनों की नम होती हैं, दुजों की नहीं।

हमारी कल की बात हो सकता है कि तुम्हें याद रहे।
जो ना याद रहे फिर कल जिये ही कहां?

धड़कनें तेज हो जाती हैं तुम्हारी जब जब,
में पैरों को जकड़ लेता हूं तब तब।

जिंदगी जी कैसे जाय सब बताएं हमको,
वो जिंदगी ही क्या जिसमें यादें ना हो।

ए आज तु रुक जा मत जी ले कहीं,
कल भी तो तुझे जीना है जो तु जिया आज नहीं।

ज़िंदगी एक दो पल की है, घंटों की नहीं।
आंखें अपनों की नम होती हैं, दुजों की नहीं।
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Wednesday, April 24, 2019

Take charge and enjoy!

When the oceans scream high
But your life runs dry

You have things yet to try
But the time plays sly

When you've missed being in joy
But your work lets you fry

When you sleep open eye
But your dreams fly by

Ask this question as to why
Are you living and passers-by
Are happier than thy
Leave these don't be shy

Let the life give you pie
While you fly in the sky
And your friends drive by
Whoa! Better get back to enjoy!

इश्कबाजी

उल्फतों के दौर में हम तनहा हैं
और वो कहीं भीड़ में खोये हुए से

हम हैं जिन्हे रातों को नींद नहीं आती
और वो सपनो की दुनिया में सोये हुए से

हम उनके इक दीदार को तरसे हुए हैं
और वो अपने अश्कों में दीपक संजोये हुए से

इश्कबाजी की ज़ुर्रत कितना भी कर लें
पर वो अपनी धुन में हीं उलझे हुए से

मिलके बिछड़े हुए दोस्त

राहे मोहब्बत पर चलते रहे हम
उनकी थी अब बारी
आँखों में देखा हाथों को थामा
बातें भी कर ली सारी

समझे नहीं वो कैसे समझाउं
आती नहीं दुनियादारी
घर पे ले आये माँ को बिठाये
चली यादों की रेलगाड़ी

किस्से पुराने जो मैंने संजोये
इतनी जो की थी तैयारी
बोला नहीं मैं समझे नहीं वो
पर क्या हुआ है तो यारी

मिलना जो होगा मिलते रहेंगे
दिल हल्का हो या हो भारी
यारों की यारी अपनी जगह है
मुस्कानों की कर लो सवारी

Saturday, April 13, 2019

दिल थाम ले

बातें हुई जाती , कहीं थम जाये ना ये सिलसिला
मुलाकातें भी होंगी, मन माने क्यों ना भला

आँखें वो उनकी, जैसे झील में कमल
जब पलकें वो झुकाएं, लगे थम गया हो पल

धीमी धीमी धीमी, होठों से वो बोलें
रोकें इश्क़ कैसे, हो रहा हौले हौले

कैसे उनको मैं बताऊँ, इश्क़ हो रहा मुझको
ए दिल तू कर ले तसल्ली, और थाम ले खुदको

रास्ते और मंज़िलें

रास्ते पर मैं अकेला ही चला चलता गया
सबको पीछे छोड़ा मैंने, रास्ता मिलता गया

चलनेवाले रास्तों पर यूं अकेले क्या हुए
रास्तों ने धर दबोचा मंज़िलों के नाम पे

जो मिली मंज़िल मुझे तो ये पता मुझको चला
मंज़िलें मंज़िल न होती बस कहीं ठहराव था

मंज़िलों के और आगे और भी हैं मंज़िलें
जी ले अपनों के लिए तू फतह कर ले सब किले

रास्तों ने आज तक दिया साथ ना देंगे कभी
वो अकेले कल भी थे होंगे अकेले हर कहीं

मंज़िलों की चाहतों को छोड़ने का प्रण करो
ज़िन्दगी है चार दिन की, रंग हर दिन में भरो