Thursday, February 20, 2020

आशिक़ी

आशिक़ी

उनके हंसने से है आशिक़ी
और सांसें मुस्कुराने से
आंखों के उनका भोलापन
तड़पाती हैं मुझे।

पलकों का यूं झपकाना
और भीगे भीगे होंठ
नकबाली तेरे नाक पर
बस खींचे तेरी ओर।

घायल हैं तेरे इश्क़ में
जानें कितने ही रांझे
ऐ हूर और ज़न्नत की परी
खूबसूरती तुझसे साजे।

Tuesday, February 18, 2020

ज़िन्दगी कट रही है


ज़िन्दगी कट रही है 

सुबह के नास्ते दमदार
दिन भर मस्ती भरमार
दोस्तों के संग बातें धुआँधार
शाम में मनोरंजन की बौछार

फिर भी वो बोलते हैं
ज़िन्दगी कट रही है

ना काम का जिक्र
ना पैसे की फ़िक्र
ना खर्च का हिसाब
बने बैठे वो नवाब
ना मुँह पर लगाम
ना आँखों में सलाम

फिर भी वो बोलते हैं
ज़िन्दगी कट रही है


इश्क़ के बोल

इश्क़ के बोल 

हम उन्हें आप कहें या कहें तुम
दिन इसी में निकल गया
दिल की बातें की कम

वो चालीस के और हम साल एक कम या ज्यादा
मन में उनके शंका है इश्क़ रहेगा आधा
रोमियो जूलिएट या मजनू लैला सा इश्क़ तो अब होता नहीं
राधा कृष्ण के मिलने के कम और किस्से बिछड़ने के हैं ज्यादा

चलो छोड़ो उमर को ए दोस्त दिल से मिलो गले
और कानों में मेरे कुछ ऐसा बोलो जो
उस कसक को मीठा कर दे जब तक ये रात ढले। 

Thursday, January 30, 2020

ज़िन्दगी के उस पार

हर सुबह की दौर
रास्ते के मोड़
ले चले बस
मौत की ओर।

ख़ून का रंग
सोच का ढंग
ना बदले, बदलता है बस
अपनों का संग।

नींद में ख्वाब
जागते में रुआब
बदल गए दोनों बस
मौत का दवाब।

ज़िन्दगी की खुशबू
ज़िंदा है अब भी
मौत के सामने हंसती है जब भी
दिल में सुकून
आँखों में ख्वाब
आते हैं अब भी
पर क्या पता की कल हो
न हो, तुम हमें याद
आते थे तब भी
आते हो अब भी।

दिल में किस्से हैं
बहोत से
जो तुम्हें सुनाने थे
रह गए कहीं
खो कर हम
और तुम भी
जाने ज़िन्दगी हममें रहेगी
या मैं मौत की आहोश में
कशिश दोनों ही सूरतों में
ज़िंदा रहेगी मेरे
और सच के साथ
जो कभी दफ़्न न होती
दोस्ती जो उनसे हो
ज़िन्दगी के इस पार
या उस पार भी।

Sunday, October 20, 2019

बादल के प्यार की सच्चाई

रात सुहानी काली थी
सुबह भोली भाली है
बिन मौसम इस बारिश में
कुछ तो होने वाली है।

रात सुहानी काली थी
सुबह भोली भाली है

इंतज़ार में तेरे ये 
दिल का समंदर खाली है 
आसमान की टिप टिप से ही 
क्या ये भरने वाली है ?

रात सुहानी काली थी
सुबह भोली भाली है 

प्यासी धरती की आहों को 
सुनकर ये बादल आये हैं 
बारिश की बूंदों से आज 
धरती की प्यास बुझाई है। 

रात सुहानी काली थी
सुबह भोली भाली है 

ओ बादल अब तू ही बता 
तेरे प्यार में क्या सच्चाई है ?
आज प्यार में बरस रहा पर 
हवा के संग सगाई है। 

रात सुहानी काली थी
सुबह भोली भाली है 



Saturday, October 19, 2019

अनजान

तेरी खुशबू मेरी सांसों में,
होनी थी पर यादों में है
तू मेरे पास होनी थी
पर ख्वाबों में है

बात तुझसे ही करनी थी
पर थी खामोशी
दोनों चुप चाप चले सड़कों
पर जैसे परदेशी

वक़्त को टाल दूं जो तेरा साथ
हमें मिल जाए
तेरे ख्वाबों को बना लूं अपना
जो तेरा दिल चाहे

ग़म थे सारे जो ज़माने के वो
हमने ले ली
ज़िन्दगी साथ तेरे जीनी थी
पर मौत मिली।

फिर से ज़िंदा तेरे मैं साथ
में होना चाहूं
दिल की धड़कन मैं मेरी
तुझमें खोना चाहूं।

झांक कर देखा अभी तुम बस यहीं थे


झांक कर देखा अभी तुम बस यहीं थे।
चार दिन का था भरोसा सब सही थे?
चाहतों की बात क्या सच थी नहीं थी?
ज़िन्दगी का साथ भी सच है नहीं है?
सच छुपा रहता हमेशा, क्या हमेशा?
जो ना कहता सच वो सारा, क्या सही था?
चाहतों की बात कहना क्या सही था?
ज़िंदादिल है, मौत का सच, सच नहीं था?
मेरे सच में शक तुम्हारा या यकीं है?
दोस्ती में शक का साया क्या सही है?
चार सच मेरा तुम्हारा मैं कहीं था, तुम कहीं थे!